फतेहाबाद। कहते हैं कि अंदरूनी बैठकों की दीवारें अगर बोलने लगें, तो कईयों की कुर्सियां हिल जाएं। हाल ही में फतेहाबाद ट्रैफिक महकमे की एक ऐसी ही ‘बंद कमरा’ समीक्षा बैठक से छनकर आई खबर इन दिनों पूरे जिले में चर्चा का सबसे गरम मसाला बनी हुई है। सूत्रों का दावा है कि जब फाइलों का पर्दाफाश हुआ, तो हालात ऐसे बने कि ट्रैफिक के कई जिम्मेदारों के हलक का पानी सूख गया।
:सूत्र बोले— हाईवे का ‘मोह’ देख साहब ने लगा दी क्लास:
चर्चा है कि जैसे ही पिछले एक महीने के चालानों का कच्चा-चिट्ठा टेबल पर खुला, तो पता चला कि ट्रैफिक पुलिस का पूरा अमला नेशनल हाईवे पर ही डेरा जमाए बैठा है। सूत्रों के मुताबिक, यह देखते ही बैठक की कमान संभाल रहे अधिकारी की त्योरियां चढ़ गईं। उन्होंने सीधे-सीधे वो सवाल पूछ लिया, जिसकी गूंज पूरे विभाग में सुनाई दे रही है— “सारा दिन नेशनल हाईवे पर रहते हो ? वहां क्या ज्यादा पैसे मिलते है क्या ? या लगाव है जो शहर छोड़ वहीं डटे रहते हो?” इस तल्ख टिप्पणी के बाद मीटिंग हॉल का सन्नाटा ऐसा था कि सुई भी गिरे तो आवाज आ जाए। सूत्रों की माने तो चालान सबसे ज्यादा नेशनल हाइवे पर ही किए हुए मिले।
:कान फाड़ रही बुलेट, कागजों में ‘जीरो’ पर्ची!:
बैठक का सबसे चटपटा और हैरान करने वाला मोड़ तब आया, जब मॉडिफाइड साइलेंसर और हुड़दंग मचाने वाली बुलेट मोटरसाइकिलों का रिकॉर्ड देखा गया। शहर के बाजारों में पटाखे फोड़कर रौब झाड़ने वाली बुलेट बाइक आगे पुलिस के आंकड़े में चालान हुए ही नही थे, एक महीने के बुलेट के चालान के आंकड़े में हमारी नजर में कोई एक दो बुलेट का ही चालान बेशक हुआ, लेकिन अंदर की खबर आंकड़ों में वह भी नहीं मिले, सूत्रों का कहना है कि यह देखते ही साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कड़क अंदाज में कटाक्ष किया गया— “क्या फतेहाबाद से बुलेट का नामोनिशान मिट गया है, या फिर पुलिस ने कानों में रुई ठूंस ली है? जनता परेशान है और रिकॉर्ड में एक भी चालान नहीं!” दो टूक शब्दों में कह दिया गया कि कागजी बाजीगरी बंद करके जमीन पर मुस्तैदी दिखाई जाए। फिलहाल साहब ने बेहतर कार्य किए ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए, लेकिन जमीन पर काम करने वाले उन बेहतर कार्यों को फेल करने में लगे हुए है।
हाईवे पर क्या ज्यादा पैसे मिलते है क्या?’: बंद कमरे वाली मीटिंग में बिफरे ‘साहब’; शहर में पटाखे फोड़ती बुलेट के ‘जीरो’ चालान देख छूटे पसीने!





