गुरुग्राम (हरियाणा): एसजीटी विश्वविद्यालय (SGT University), लोकायन एवं प्रज्ञा संस्था के संयुक्त सौजन्य से आयोजित दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस “भारतीय लोकसंस्कृति, लोकचेतना के निर्माण में लोकनायक व लोकनायिकाओं की भूमिका व अवदान” के दूसरे दिन हरियाणवी संस्कृति का रंग जमकर बिखरा। इस राष्ट्रीय कांफ्रेंस और संशोधन परिषद कार्यशाला में हरियाणा की सुप्रसिद्ध एवं कोकिलकंठी लोकगायिका डॉ. कृष्णा कुमारी आर्या और हरियाणा कला परिषद के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से हरियाणवी लोकसंस्कृति का परचम फहराया और दर्शकों की भारी वाहवाही लूटी।
लोककलाओं और विधाओं का जीवंत प्रदर्शन
सांस्कृतिक संध्या के दौरान डॉ. कृष्णा आर्या ने न केवल अपने सुरों का जादू बिखेरा, बल्कि हरियाणा कला परिषद के कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों की बेहतरीन एंकरिंग (मंच संचालन) भी की। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को हरियाणा की लोकसांस्कृतिक विधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिनमें सांग, रागनी और छंद,धमाल और पारंपरिक लोकनृत्य,बालगीत, बधावा, बारहमासा, जकड़ी और हरजस
,हरियाणवी वेशभूषा और उसकी महत्ता बारे बताया।
रागनी और लोकगीतों से बांधा समां::
कार्यक्रम में डॉ. आर्या ने अपने ओजस्वी स्वर में सांग सम्राट पंडित लक्ष्मीचंद की अमर रागनी “बादल छाया हे री सखी छाई घटा घनघोर म्हारे सासरे की ओर सामण आया हे री सखी” गाकर माहौल को संगीतमय कर दिया। इसके बाद उन्होंने “हम हरियाणा के वासी अभिलाषी ना आराम के” और हरियाणा की माटी का गौरवगान करते हुए प्रसिद्ध गीत “देसा मैं देश हरियाणा, जित दूध दही का खाणा” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
::शृंगार से लेकर भक्ति रस तक का सफर: सांस्कृतिक गीतमाला की शुरुआत शृंगारिक लोकगीतों—”पहलम् तो मैंने दामण सीमा दे फेर जाइये हो पलटण मैं” और “पंखा जाली का लगवा दे भरतार महीना आया गरमी का” से हुई। इसके बाद उन्होंने भक्ति रस से सराबोर गीत “राम रै लछमण दोनू भाईदोनू बणखण्ड जाँय हे जी” गाया। कार्यक्रम का समापन स्वामी दयानन्द सरस्वती को समर्पित प्रसिद्ध बधावा लोकगीत “जीजी हम के बधावो जानै था म्हानै दयानन्द आय सिखायो हे सखी आज बधाओ रिसी दयानन्द नै” से हुआ।
::राष्ट्रीय मंच पर सांस्कृतिक महासंगम::
इस दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन जहाँ महाराष्ट्र के लोक कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी थीं, वहीं दूसरे दिन की शाम पूरी तरह से हरियाणवी लोकनृत्य, लोकगीत और रागनियों के नाम रही।
इस अवसर पर गरिमामयी उपस्थिति:
इस भव्य सांस्कृतिक संध्या में एसजीटी यूनिवर्सिटी के डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. विजय शर्मा, लोकायन संस्था की अध्यक्ष मोनिका ठक्कर, प्रज्ञा के डायरेक्टर कमलकान्त पाठक, केंद्रीय प्रमुख (हिन्दू अध्ययन समूह) प्रो. मुरारीशरण शुक्ल, डॉ. हृदयेश खिल्लारे, डॉ. कुसुम और रौशनी सहित कई गणमान्य शिक्षाविद, कलाकार और छात्र उपस्थित रहे।
हरियाणा की कोकिलकंठी लोकगायिका डॉ. कृष्णा कुमारी आर्या ने राष्ट्रीय कांफ्रेंस में फहराया हरियाणवी संस्कृति का परचम






