फतेहाबाद। आधुनिक तकनीक के इस युग में साइबर अपराधी मासूम नागरिकों को लूटने के लिए नए और खतरनाक हथकंडे अपना रहे हैं। फतेहाबाद के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धांत जैन, आईपीएस ने “डिजिटल अरेस्ट” नाम के उभरते साइबर फ्रॉड के प्रति आमजन को विशेष रूप से सतर्क किया है। उन्होंने कहा कि ठग लोगों को मानसिक रूप से डराकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प रहे हैं।
कैसे जाल में फंसाते हैं ठग? एसपी ने बताया कि अपराधी खुद को CBI, NIA या पुलिस अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं। वे ड्रग्स तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों का डर दिखाते हैं और नकली वारंट भेजकर पीड़ित को घंटों कैमरे के सामने रहने को मजबूर करते हैं। इसी “डिजिटल निगरानी” के दौरान डरा-धमकाकर बैंक डिटेल्स और ओटीपी हासिल कर लिए जाते हैं
कानूनी प्रक्रिया को समझें एसपी सिद्धांत जैन ने स्पष्ट किया कि भारत में गिरफ्तारी या पूछताछ की एक वैधानिक प्रक्रिया है जो प्रत्यक्ष रूप से की जाती है। कोई भी सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता और न ही पैसे की मांग कर सकता है।






