Wednesday, September 2, 2026
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आज की सियासी ‘नौटंकी’ बनाम असली ‘क्रांति’: नेता जी, 2019 का वो जन-आक्रोश भूल गए क्या?

फतेहाबाद( पंडित जी): शहर में इन दिनों एक नए ‘महानायक’ का उदय हुआ है। सफेद चोला पहनकर नशा मुक्ति की माला जप रहे नेता जी आजकल खुद को नशे के खिलाफ जंग का इकलौता सुरमा बता रहे हैं। उनकी बातों से तो ऐसा लगता है जैसे पूरी सरकार और पुलिस सो रही है और अकेले वही ‘सिस्टम’ सुधार रहे हैं। लेकिन जनता पूछ रही है— “साहब, जब 2019 में फतेहाबाद नशे में जल रहा था, तब आप किस बिल में छिपे थे?”

असली जंग: जब जनता ने संभाला था मोर्चा
इतिहास के पन्ने पलटें तो याद आता है साल 2019 का वो जून, जुलाई-अगस्त का महीना। नशा तब भी चरम पर था, लेकिन तब आज के समय मे खुद को ‘नायक’ मानने वाले नेता नदारद थे। उस समय नशे के खिलाफ असली महानायक हरदीप सिंह, प्रवीन काशी और ढिंसगरा गांव के ग्रामीण थे। कई जन-संगठनों और पार्षदों ने मिलकर वो जन-आक्रोश पैदा किया था कि सत्ता की कुर्सियां हिल गई थीं। उस सच्ची आवाज का ही असर था कि सीएम से लेकर मंत्रियों तक ने संज्ञान लिया और जिले में ताबड़तोड़ कार्रवाई हुई।

पुलिस की मेहनत, नेता जी की मलाई
आज जब पुलिस तस्करों को सलाखों के पीछे भेज रही है और डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं, तो नेता जी सारा ‘क्रेडिट’ अपनी जेब में डालकर फोटो खिंचवा रहे हैं। सत्ता की हनक ऐसी कि खुलेआम कह रहे हैं— “पावर हाथ लगी तो इनका इलाज कर दूंगा!”

बड़ा सवाल: जो नेता कही न कही अपनी ही सरकार की व्यवस्था पर उंगली उठाकर खुद को हीरो साबित करने में जुटे हैं, जनता उनका ‘अंदरखाते’ वाला मोटिव बखूबी समझ चुकी है। असली नायक वो माएँ हैं जिनके लाल नशे की भेंट चढ़े और वो लोग जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के 6 साल पहले बदलाव की नींव रखी थी और आज भी उस नींव पर काम कर रहे हैं।

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