Monday, September 14, 2026
spot_imgspot_img

Top 5 This Week

Related Posts

खाकी के भीतर घुटती सांसें: लंदन से आ रहे बच्चों को क्या बताएंगे कि पिता को बीमारी ने मारा या सिस्टम के जुल्म ने?

हिसार / फतेहाबाद
शुक्रवार की अलसुबह करीब पांच बजे जब पूरा भिवानी रोहिल्ला गांव गहरी नींद में था, 48 वर्षीय ईएचसी लेकराम हमेशा की तरह बिस्तर से उठे। सामने खूंटी पर टंगी वही खाकी वर्दी थी, जिसे उन्होंने अपनी जिंदगी के कई दशक समर्पित कर दिए थे। उन्होंने जूते के फीते कसे, वर्दी पहनी और फतेहाबाद पुलिस लाइन की ड्यूटी पर निकलने की तैयारी करने लगे। लेकिन किसे पता था कि फर्ज की राह पर बढ़ने वाले ये कदम चौखट तक भी नहीं पहुंच पाएंगे। अचानक सीने में ऐसा असहनीय दर्द उठा कि लेकराम वहीं गिर पड़े। आनन-फानन में निजी अस्पताल ले जाया गया, डॉक्टरों की सांसे थमीं और कुछ ही देर में खबर आई कि लेकराम अब इस दुनिया में नहीं रहे।कागजों पर इसे ‘हार्ट अटैक’ लिख दिया गया, लेकिन जो सिसकियां और चीत्कार लेकराम के घर से उठ रही हैं, वो सीधे तौर पर पुलिस लाइन के भीतर चल रहे उत्पीड़न के गंदे खेल की ओर उंगली उठा रही हैं।
:सात रातें… न आंखें लगीं, न दर्द थमा:
लेकराम के भाई जय सिंह जब मीडिया और पुलिस के सामने अपनी बात रखते हैं, तो उनका गला भर आता है और आंखों से आंसू बह निकलते हैं। वे पूछते हैं— “क्या पुलिस की नौकरी का मतलब यही है कि कोई इंचार्ज अपनी कुर्सी की हनक में किसी की जान ले ले?” जय सिंह का आरोप है कि लेकराम पिछले सात दिनों से एक पल भी चैन से सो नहीं पाए थे। गार्द इंचार्ज हर रोज उन्हें ड्यूटी के नाम पर इस कदर जलील और परेशान कर रहा था कि वे अंदर ही अंदर घुट रहे थे। इसी भारी मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए वे दो दिन की छुट्टी लेकर गांव आए थे, ताकि अपनों के बीच सांस ले सकें। लेकिन उस टॉर्चर का खौफ इतना गहरा था कि ड्यूटी पर वापस लौटने की सुबह ही उनके दिल ने उनका साथ छोड़ दिया।
::”साहब, मेरी ड्यूटी कटवाने दो लोग गए थे…”::
यह केवल एक आरोप नहीं, बल्कि उस सिपाही की आखिरी चीख है जो उसने दुनिया छोड़ने से ठीक 24 घंटे पहले अपने एक करीबी के सामने बयां की थी।
सूत्रों के मुताबिक, मौत से ठीक एक दिन पहले लेकराम ने बेहद भारी मन से अपने एक साथी से कहा था— “साहब! लाइन में मेरी ड्यूटी बदलवाने और परेशान करवाने के लिए दो लोग ड्यूटी ऑफिसर तक पहुंचे थे।”
सवाल उठता है कि आखिर लेकराम से ऐसी क्या दुश्मनी थी? किसी चहेते को मलाईदार ड्यूटी दिलाने का चक्कर था या फिर किसी अफसर की निजी रंजिश? महकमे के कई साथी दबी जुबान में यह मानते हैं कि लेकराम लंबे समय से इस जुल्म के शिकार थे और उन्होंने कई बार अपने नजदीकी सीनियर अफसरों के आगे हाथ जोड़कर अपना दर्द बयां भी किया था। लेकिन वर्दी के अनुशासन की आड़ में उस सिपाही की फरियाद फाइलों और कमरों में दबकर रह गई।
:सात समंदर पार लंदन में जब टूटी मनहूस खबर:
लेकराम का एक भरा-पूरा, हंसता-खेलता परिवार था। उनकी बेटी शादीशुदा है और अपने पति के साथ लंदन में रहती है। पिता ने खून-पसीना एक करके अपने छोटे बेटे को भी उच्च शिक्षा के लिए बहन के पास लंदन भेजा था। पिता का सपना था कि बच्चे पढ़-लिखकर दुनिया में नाम कमाएं। लेकिन शुक्रवार की सुबह जब लंदन में घंटी बजी, तो दोनों मासूम बच्चों के पैरों तले से जमीन खिसक गई। जिस पिता ने उन्हें हवाई जहाज में बिठाते वक्त मुस्कुराकर अलविदा कहा था, आज उसी पिता के कफन का चेहरा देखने के लिए वे हजारों किलोमीटर दूर से भागे-भागे आ रहे हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है कि जब वे बच्चे घर आएंगे, तो उन्हें क्या जवाब दिया जाएगा? क्या उनसे कहा जाएगा कि उनके पिता किसी अपराधी की गोली से नहीं, बल्कि अपने ही महकमे के भीतर बैठे एक इंचार्ज के अहंकार की भेंट चढ़ गए?
::अस्पताल का फर्श, परिजनों का गुस्सा और तीन डॉक्टरों का बोर्ड:
हिसार के नागरिक अस्पताल में जब शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा, तो घंटों तक डॉक्टरों की सुस्ती ने परिजनों के सब्र का बांध तोड़ दिया। अस्पताल के गलियारे चीखों से गूंज उठे, जमकर हंगामा हुआ। माहौल बिगड़ता देख तीन डॉक्टरों के विशेष बोर्ड का गठन किया गया और पोस्टमार्टम के बाद विसरा सैंपल लैब भेजा गया। बालसमंद चौकी इंचार्ज राजबाला इसे महज इत्तेफाकिया मौत बता रही हैं, लेकिन परिजनों की आंखों में जलती इंसाफ की आग शांत होने का नाम नहीं ले रही।एसपी निकिता खट्टर ने निष्पक्ष जांच का भरोसा तो दिया है, लेकिन सवाल वही है— क्या फतेहाबाद पुलिस अपने ही एक साथी की मौत के गुनहगारों को बेनकाब करेगी, या फिर मामले को कागजी लीपापोती और ‘हार्ट अटैक’ के मेडिकल टर्म के नीचे हमेशा के लिए दफन कर दिया जाएगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles