भूना(फतेहाबाद): कहते हैं कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की नजरों से बच नहीं सकता। फतेहाबाद के रायपुर ढाणी में एक शख्स ने अपनी चतुराई से पुलिस की आंखों में धूल झोंकने की पूरी तैयारी कर रखी थी। घर के पीछे प्याज की लहलहाती फसल थी, लेकिन उन प्याजों के बीच ‘काले सोने’ (अफीम) की साजिश पनप रही थी। उसे लगा था कि प्याज की महक अफीम के अवैध कारोबार को छिपा लेगी, लेकिन सीआईए रतिया की टीम ने प्याज के हर छिलके की तरह उसकी साजिश की परतें उधेड़ कर रख दीं।
सब्जी के साथ ‘नशे’ की खेती: प्याज की फसल बनी ढाल
आरोपी अग्रेज सिंह ने अपने घर के पिछवाड़े में बड़ी ही चालाकी से प्याज बोए थे। इन्हीं प्याज के पौधों के बीच उसने अफीम के पौधे रोप दिए। उसका मानना था कि दूर से देखने पर सब कुछ सामान्य सब्जी की खेती जैसा लगेगा और किसी को शक तक नहीं होगा। लेकिन उसकी यह ‘स्मार्ट प्लानिंग’ पुलिस के ‘इंटेलिजेंस नेटवर्क’ के आगे फेल हो गई।
गुप्त सूचना और पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’::सीआईए रतिया प्रभारी उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार को जैसे ही इस अवैध बागवानी की भनक लगी, उन्होंने बिना वक्त गंवाए जाल बिछा दिया। सहायक उपनिरीक्षक रघुबीर सिंह के नेतृत्व में टीम ने रायपुर ढाणी में अचानक दबिश दी। जब पुलिस टीम खेत में घुसी, तो आरोपी के होश फाख्ता हो गए।
गिनती में निकले 20 पौधे, मौके पर ही आरोपी ‘सरेंडर’
तलाशी के दौरान पुलिस ने प्याज की आड़ में छिपे अफीम के 20 हरे-भरे पौधे बरामद किए। इन पौधों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी अग्रेज सिंह को रंगे हाथों धर दबोचा। आरोपी को अंदाजा भी नहीं था कि उसकी यह ‘सीक्रेट खेती’ उसे सलाखों के पीछे ले जाएगी।
नशा मुक्त फतेहाबाद’ अभियान को बड़ी सफलता:पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन (IPS) के नेतृत्व में जिला पुलिस नशे के सौदागरों के खिलाफ फुल एक्शन मोड में है। यह कार्रवाई इसी कड़ी का हिस्सा है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि चाहे कोई जमीन के नीचे नशा छिपाए या फसलों के बीच, उसे ढूंढ निकाला जाएगा






