फतेहाबाद: नशा सिर्फ शरीर को नहीं गलाता, वह रूह को खोखला कर देता है और हंसते-खेलते परिवारों को खामोश कब्रिस्तानों में बदल देता है। लेकिन जब समाज और प्रशासन मिलकर ‘इंसानियत’ का हाथ थाम लें, तो राख के ढेर से भी जिंदगी की नई कोपलें फूट सकती हैं। फतेहाबाद में पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन (IPS) की पहल ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति’ ने आज एक ऐसी ही मिसाल पेश की है, जिसने न केवल एक युवक को मौत के मुंह से निकाला, बल्कि एक पूरे परिवार को बिखरने से बचा लिया।
एक ढलान की शुरुआत: जब सपनों पर लगा नशे का ग्रहण
गांव भरपूर का अरुण कुमार कभी अपने माता-पिता की आंखों का तारा और अपनी पत्नी व बच्चों का मजबूत सहारा था। लेकिन 8 साल पहले ‘चिट्टे’ और ‘मेडिकल नशे’ ने उसकी जिंदगी में जहर घोल दिया। नशा बढ़ा, तो घर की सुख-शांति घटने लगी। दो छोटे बच्चों के सिर पर पिता का साया तो था, पर पिता की मौजूदगी नहीं थी। गरीबी और कलह के बीच अरुण समाज की नजरों में सिर्फ एक ‘नशेड़ी’ बनकर रह गया था।
’ऑपरेशन जीवन ज्योति’: सजा नहीं, सहारा
अक्सर समाज ऐसे युवाओं से मुंह मोड़ लेता है, लेकिन एसपी सिद्धांत जैन की सोच अलग थी। उन्होंने माना कि नशे की गिरफ्त में फंसा व्यक्ति अपराधी नहीं, बल्कि एक मरीज है जिसे डांट की नहीं, दिशा की जरूरत है। इसी विजन ने जन्म दिया ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति’ को। इस अभियान से प्रेरित होकर गांव भरपूर के सरपंच प्रतिनिधि दिनेश कुमार भारती आगे आए। उन्होंने अरुण को तिरस्कृत करने के बजाय उसे अपने गांव का ‘भटका हुआ बेटा’ माना। एसपी साहब के मार्गदर्शन और नशा मुक्ति टीम प्रभारी सुंदर लाल की निरंतर काउंसलिंग ने अरुण के मन में जीने की इच्छा जगाई।
जब मानवता ने उठाया जिम्मेदारी का बोझ
इस कहानी का सबसे सुंदर मोड़ तब आया जब सरपंच प्रतिनिधि दिनेश कुमार भारती ने अरुण के इलाज का सारा खर्च निजी तौर पर उठाने का फैसला किया। बिना किसी दिखावे के, तीन महीने तक अरुण का इलाज चला। उसे अहसास कराया गया कि उसका परिवार और समाज आज भी उसका इंतजार कर रहा है।
लौट आई घर की मुस्कान:
आज अरुण कुमार पूरी तरह नशा मुक्त है। आज उसकी पत्नी प्रीतम देवी की आंखों में खौफ नहीं, बल्कि सुकून है। उसके बेटे रचित और जतिन अब गर्व से अपने पिता की उंगली पकड़कर चलते हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि एक अटूट संकल्प की जीत है।
एक मशाल से जलीं कई और मशालें
अरुण की इस कामयाबी ने पूरे जिले में बदलाव की लहर पैदा कर दी है।
अरुण से प्रेरित होकर जिले की 9 अन्य पंचायतों (फूला, बुर्जा, चिम्मो, चदों, मुशींवाला, लधुवास, अलीपूर बरोटा और कुनाल) ने भी अपने-अपने गांवों के दो-दो नशेड़ी युवाओं को गोद लेने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
कठोर कार्रवाई और कोमल स्पर्श का संगम
जहाँ एक ओर प्रशासन सुधार की राह दिखा रहा है, वहीं नशे के सौदागरों पर प्रहार भी जारी है। एसपी सिद्धांत जैन के नेतृत्व में अब तक 347 मामले दर्ज कर 725 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
निष्कर्ष: ‘ऑपरेशन जीवन ज्योति’ आज केवल एक सरकारी फाइल का नाम नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का नाम है जो कहता है—”अगर एक युवा बच गया, तो एक परिवार बच गया… और अगर परिवार बचा, तो समाज बच गया।”
सिद्धांत जैन, एसपी।






